शनिवार, 10 दिसंबर 2011

''अपना '' है मेरा सपना


भाषा की गोद में,
सत्य के शोध में,
विचारों के गतिरोध में,
पलता है मेरा सपना .

आशाओं की डोर से ,
उम्मीदों की भोर से,
निष्ठा के जोर से,
अठखेलियाँ करता है मेरा सपना.

निर्विकार-निराकार संसार से,
जोश के उदगार से ,
निर्मल व्यवहार से
अपनों से ज्यादा ''अपना '' है मेरा सपना

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