सोमवार, 19 सितंबर 2011

जिस राह का मैं पथिक


जिस राह का मैं पथिक
विचलित -भ्रमित मैं नहीं तनिक
अगर-मगर की बहुत निकली डगर
न क़दमों में कम्पन ,मैं चला निर्भीक

थामा है दामन सच का
प्रहारों से मैं न बिचका
यज्ञ है यह उन आह्वानो का
ऋणी रहा हूँ बचपन से जिनका

आहुति कुंड की लपटों से मेरे
लालिमा लिया नभ है घेरे
शंखनाद बलिदान का वहां हैं फूंका
माया -लोभ के जहां डले हैं डेरे

शिशु से शिथिल अवस्था तक की दूरी
समय लगे बिन देर होती है पूरी
कहत करत चल बसे सयाने
सतकर्म गति बिन अधूरी जीवन धुरी

गुरुवार, 15 सितंबर 2011

ईमान


दुनिया का दस्तूर है

बेईमान बेक़सूर है

ईमान बिकता है दर दर

न बेचने वाला जलता ज़रूर है

गुरुवार, 8 सितंबर 2011

रिश्ता


फिज़ा वो
बदरा मैं
बरसा मैं
महका वो

चिराग वो
रोशनी मैं
बिखरा मैं
निखरा वो

ज़मीं मैं
फ़लक वो
उतरा वो
भीगा मैं

गरजा वो
गुज़रा मैं
गुज़रा मैं
बिखरा(तड़पा ) वो .........